कुण छै बाप

माई कद सूं कोई नं

ऊमर कांई कतनी छै—मत पूछज्यो

कतना दिन होया हजामत बणायां

कद खंगाळेगो अंगरखी

जे भीज’र पसीना मं कचकड़ो होगी

ऊनै कांई की बी तोल कोई’न

कांई छै ऊंका मन मं

ऊंसूं मत पूछज्यो

सूनी छै भोळी-भोळी आंख्यां

कांई छै सुपना वांका

चेनदार बटवो छै जाणे

मत खोलज्यो

मत झांकज्यो म्हलाड़ी

खाल का खरूंट मत हेड़ज्यो

घाव सेळी लाई का देखोगा तो दहळ ज्यागा

मत पूझज्यो

घर गहणै क्यूं महल्यो

जमीं क्यूं बेची

मत पूछज्यो।

स्रोत
  • पोथी : आंथ्योई नहीं दिन हाल ,
  • सिरजक : अम्बिकादत्त ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
जुड़्योड़ा विसै