ग़रीबी पर कवितावां

ग़रीबी बुनियादी आवश्यकताओं

के अभाव की स्थिति है। कविता जब भी मानव मात्र के पक्ष में खड़ी होगी, उसकी बुनियादी आवश्यकताएँ और आकांक्षाएँ हमेशा कविता के केंद्र में होंगी। प्रस्तुत है ग़रीब और ग़रीबी पर संवाद रचती कविताओं का यह चयन।

कविता71

औ कुण आयो, औ कुण आयो?

आईदान सिंह भाटी

इंकलाब री आँधी

रेवतदान चारण कल्पित

आजादी री जीत कठै है

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

रोयां रुजगार मिळै कोनीं

रेवतदान चारण कल्पित

माटी थनै बोलणौ पड़सी

रेवतदान चारण कल्पित

त्यूंहार

राजेन्द्र गौड़ 'धूळेट'

सूरमा

पवन सिहाग 'अनाम'

अेक रोटी

विजय राही

भूख अर कविता

आशीष पुरोहित

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

राजमहलां सांभळौ

तेजस मुंगेरिया

बरसगांठ

रेवतदान चारण कल्पित

म्हनै लिखणौ नीं आवै

पवन सिहाग 'अनाम'

गांव रा समाचार

हरदान हर्ष

घड़िया

ज्योतिपुंज

करां कांई

चन्द्र प्रकाश देवल

गरीबी रा झाड़

हरदान हर्ष

आतम-निरभर

शंकरसिंह राजपुरोहित

आजादी

भगवती लाल व्यास

मिगसर

रेवतदान चारण कल्पित

झूंपड़ो

कानसिंह भाटी

दिवलौ

रघुराजसिंह हाड़ा

बखत

गोरधन सिंह शेखावत

आकाश रो टुकड़ो

श्याम सुन्दर टेलर

अनोखौ काळ

रेवतदान चारण कल्पित

गरीब की जोरू

गोविन्द हाँकला

तूफांन

रेवतदान चारण कल्पित

जिणा रे घर कोनी होवे

भागीरथ मेघवाल

चुनाव डायरी सूं

कृष्ण कल्पित

रोटी

रतन ‘राहगीर’

लारलै बरस

श्याम महर्षि

सांचकलो रूप

घनश्याम नाथ कच्छावा

भूख री ओळखाण

शंभुदान मेहडू

काल-चक्र

मोहन आलोक

काळ/ अकाळ/ महाकाळ

रेवतदान चारण कल्पित

राज बदळग्यौ म्हांनै कांई

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

बगत रौ हेलो

अर्जुनसिंह शेखावत

अभाव मूं

हरदान हर्ष

सुळ सुळियो

मोहम्मद सदीक

भौळी जनता

मोहम्मद सदीक

नवौ कुरुखेत

रेवतदान चारण कल्पित

म्हारौ भगवान

पवन सिहाग 'अनाम'

समाजवाद

श्याम सुन्दर टेलर

चीणी चाळा काटगी

भंवरलाल महरिया 'भंवरो'

लावौ दौ माचिस

पारस अरोड़ा