ग़रीबी पर दूहा

ग़रीबी बुनियादी आवश्यकताओं

के अभाव की स्थिति है। कविता जब भी मानव मात्र के पक्ष में खड़ी होगी, उसकी बुनियादी आवश्यकताएँ और आकांक्षाएँ हमेशा कविता के केंद्र में होंगी। प्रस्तुत है ग़रीब और ग़रीबी पर संवाद रचती कविताओं का यह चयन।

दूहा3

करन्यास

ऊमरदान लालस

वैद रहीजै राज-घर

सूर्यमल्ल मीसण

काळ बरस रौ बारामासौ

रेवतदान चारण कल्पित