नसां नै छौड़, पंथ नै मोड़, जलम सूधर जासी।

देख तम्बाखू रा धूंआं सूं, हाथी डिग जासी।

जलम सुधर जासी॥

हूंकारी गड़-गड़ सूं, गड़ बड़, तन रौ तेज हुवै।

काया कांचळी पळ-पळ फाटै, पाछी कुण सींवै।

तन-धन खोवै, आंसू रावै सांसा ढळ जासी।

जलम सुधर जासी॥

बीड़ी बिगाड़ै डोळ, खोळ में दाग लगादै।

जोध जवानी रूप रवानी, पींदै पहुंचा दै।

दांत झड़ै, अर आंत सिड़ै, थारी निजरां घट जासी।

जलम सुधर जासी॥

लटका-झटका गुटका खावै, मुख रा रोग बुलावै।

नीं जाणै बै हुवे बीमार्‌यां, घर-घर वेद बुलावै।

बाळपणै री बुरी आदतां, काया कुम्भळासी।

जलम सुधर जासी॥

सिगरेट स्यान समझणा, मोल जान रो जाणी।

गुल झड़ता, गुल बदन झड़ै, रूप्या बणसी पाणी।

धुंओं जठै है, आग बठै सूं, समझण कद आसी।

जलम सुधर जासी॥

दारू सारू दर-दर भटकै, धन री धूळ करै।

जीवण जोबण ढीळ पड़सी, कांची मोत मरै।

मद मैफल नै छौड़ भायला, गोडा गळ जासी।

जलम सुधर जासी॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कल्याणसिंह राजावत ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-17
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