हूं जद कदै भी
डाळा न्हांख्योड़ो
डफळीज्योड़ो
कांच में मूंडो देखूं
नीं ठा
मनै क्यूं याद आवै
बा कीड़ी
जिकी बिना टसका मसका कर्यां
मुवाळ ज्यूं मजबूत नेचै
अर समन्दर ज्यूं
गैर गम्भीर
आतम बिस्वास रै सागै
चालती रै
चालती रै
अर
मांडती रै
आपरै पगां रा सैनाण
बीं घड़ी
म्हांरै मांय
जाणै झुरझुरी उठै
डफळीज्योड़ै
मूंडै री जागां
नूवीं आस रा
अंकुर फूटै।