देखो भाइड़ो कतो मीठो जीवण तणो संगीत,

दसूं दिसावां में बाज रैयौ ज्यों अणहद गीत।

जिनगाणी अजब पहेली जीत कहूं कै हार,

सुख रै उजळै दुवार पर दुख रो पोरैदार।

मतना सोच कर जीवड़ा है काळी रात,

घड़ी स्यात में भोर होण सूं आवैलो नुंवो प्रभात।

मेरो मनड़ो मानै कोनी देखै सुख री आस,

सुख रो सपनो जोवतां छूटी जीवण आस।

सदा चालती आई है दुनिया री रीत,

अरै जीवड़ा कतो कोजो जीवण तणो संगीत।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : महेन्द्रसिंह मील ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक–18
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