हूंस पर कवितावां

हूंस, साहस वह मानसिक

बल या गुण है, जिसके द्वारा मनुष्य यथेष्ट ऊर्जा या साधन के अभाव में भी भारी कार्य कर बैठता है अथवा विपत्तियों या कठिनाइयों का मुक़ाबला करने में सक्षम होता है। इस चयन में साहस को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

कविता130

बेटियां

कृष्णा आचार्य

खेत-स्क्रैप

मोनिका गौड़

घट्टी

मुकुट मणिराज

जातरा

किशन ‘प्रणय’

खास बात

मोहन आलोक

सफळता रा पागोथ

जेठानंद पंवार

बूढ़ा बडेरा टाबर टोळी

कृष्णा आचार्य

कलम उठा

इरशाद अज़ीज़

हेताळू

कमर मेवाड़ी

काळ

रावत सारस्वत

निरखूं जग

राजेश कुमार व्यास

औ जीवण जीणो पड़सी

अवन्तिका तूनवाल

किण रो दोस?

रामनरेश सोनी

कांकरा

नलिनी कुम्भट

ढळता मोती

महेंद्र मोदी

बिस्वास राखजे

प्रहलादराय पारीक

मां अर बेटो

सत्येंद्र चारण

बीज

चंद्र सिंह बिरकाळी

जुड़ाव

गिरिजा शंकर शर्मा

हेत रो हींडौ

कृष्णा जाखड़

कद अेकलो ऊभो हूँ

संदीप 'निर्भय'

महारी आस

सत्येंद्र चारण

स्यात

सुमेरसिंह शेखावत

हूंस री डोर

हरीश सुवासिया

थारी प्रीत

पवन राजपुरोहित

जिनगांणी

कल्याणसिंह राजावत

बतळावण

इन्द्र प्रकाश श्रीमाली

अदीठो

अनुराग

बसेवान

अनिल अबूझ

प्रभातियौ तारौ

वाज़िद हसन काजी

सुण म्हारा साथी

इन्द्र प्रकाश श्रीमाली

आंधी

श्याम महर्षि

अचूंभो

सोनाली सुथार

मारग री हूंस

चन्द्र प्रकाश देवल

पगां मत लाग

शैलेन्द्र सिंह नूंदड़ा

उठाया दोनूं हाथ

प्रियंका भट्ट

म्हूं लिखूंला

रामकुमार भाम्भू

अंतस री हूंस

इरशाद अज़ीज़

धीज देवण सारू

सत्यदेव संवितेन्द्र

थारै आबा की आस

मंजू किशोर 'रश्मि'

बोदी भींत

अनुराग

इतिहास बदळतौ दैखांला

कल्याणसिंह राजावत

जीवण तणो संगीत

महेन्द्र मील

धीज

भगवान सैनी

नखलिस्तान बणा द्‌यूंगो

विनोद सोमानी 'हंस'