अेक संसार उण रो भी है
जिण रो कोई संसार नीं है
फेरूं ई
कुछ इसा बी है
जिण रो कोई संसार नीं है
जीवण जिणरै वास्तै
अेक प्रेक्षागृह है अर–
मौत जिण रै वास्तै अेक पटाक्षेप
बीच रै इण अन्तराल मांय
कितना संसार बणै है
आ रेल रै डिब्बै में बैठ’र
कांच रै पीछै सूं देखी
जा सकै है।