म्हनै प्यारो लागै म्हारो डूंगर धोरां हाळो देस

सावण मास सुरंगलो जी, घिरै घटा घणघोर

घन-घन गाजै मेवलो जी, बन—बन नाचै मोर

म्हानै वाळो लागै म्हारो

कुरजां मोरां वाळो देस

लड़झड़ लूमै बोरड्यां जी, सांगरियां झाझोर

खोखा चोखा चिलगोजा सा, छुहारा रा बोर

म्हानै प्यारो लागै म्हारो

संगर बोरां हाळो देस

नागौरी बळदां री जोड़ी, बावै ऊंडी फाळ

जैसलमेरी सांढ़ियां जी, पूठी देवै भाळ

म्हानै प्यारौ लागै म्हारो

डांगर ढोरां हाळो देस

रात रुपाळी दिन सोणैला, रत-रत री रंगरेळ

मानधणी मिनखां रा मेळा, हुवै मनां रा मेळ

म्हानै प्यारो लागै, तीजां

अर गणगोरां हाळो देस

वै नखराळी गोरड़्यां, वै नेहीड़ा निरदुंद

वा ऊजळी वो जेठवो, वै सयणी बीझाणंद

म्हानै प्यारो लागै म्हारो

मरवण ढोला हाळो देस

वै बांकी रजपूतण्यां, बै रणबंका राठौड़

पग तो रुपियो पागड़ै में, माथै बंधियो मोड़

म्हनै प्यारो लागै म्हारो

सतियां सूरां हाळो देस।

स्रोत
  • पोथी : राजस्थान के कवि ,
  • सिरजक : मदनगोपाल शर्मा ,
  • संपादक : रावत सारस्वत ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य संगर, बीकानेर
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