चालतोई चाल!
खींचतोई चाल!
गाडो अर गाडै रै असवार नै।
चालतोई चाल, चालतोई चाल।
झुक्योड़ी नसड़ी
अर झरतै नैणां सूं
डिचकारी रै सारै–
या खारै बैणां सूं चाळीस,
तो भी तनै ही चालणो पड़सी।
अर नसड़ी उठायोड़ो,
बिना हड़बड़ायोड़ो,
भार री मार नै पी’र
मुळकतो चाळीस,
तो भी चालणो तनै ही पड़सी
फेर, क्यूं तो
बळै रीस्यां,
अर क्यूं खावै किड़किड़ी–
असवार माथै
कै थारी जूण ऊपर।
जे नीं भी मिलै–
कदै हरी भरी सेवण
तो रूखा-सूखा
डांखळा अर डोका–
चबांवतोई चाल।
चालतोई चाल-चालतोई चाल!
चालतोई चाल–
अेक नूंवै जोस सूं।
चीरतो ई चाल
बाळू रा धोरा,
धूड़ री धेंसळ
अर छर्रै रा रस्ता,
इण सबरै माथै
माण्डतोई चाल–
थारै पगां रो सैनाण
अर बणावतोई चाल-अेक नूंवी पगडंडी
चालतोई चाल चालतोई चाल।