बाखळ री चूंतरी माथै

हरमेस अेक

मोरियो आवै

अर

दादो उणनै आपरै

हाथां मांय रोटी रा टुकड़ा

चुगावै।

दादै री ज्यूं करणै री

म्हैं सोचूं!

पण मोरियो मेरै सूं

डरै अर भाजै दूर..।

क्यूंकै

बिस्वास थरपतां

बखत लागै।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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