बागां आयो बसन्त, फूलां फुलझण मै
रागां छायौ बसन्त, सरगम सुळझण मै
रूप तिजोरी भर-भर गोरी
रखै रूखाळी दो'री-सौ 'री
डर-डर चालै गळी गुमेजण—
कर लेवै नी कोई चोरी
डीलां ढ़ळ्यौ बसंत, नैणा उळझण मै
रंगा ही रंगां मै रमलै
संगी रै सागा मै गमलै
गा लै जितरा गीत गईजै—
सोरभ री सेवा मै जमलै
जीवण जग्यौ बसन्त, जळ मत झुळसण मै
कोयल बोलै, बिण री सुणलै
तितली री पांखां मै तुललै
कुदरत पाठ पढ़ावै बेली—
भंवरां री गुण गुण नै गुणलै
भावां भायौ बसंत, समलै सिरजण मै
कळियां केवै सुरज उगाळी
बात करै मत, संझ्या वाळी
मावस रो आकास भूलज्या—
रात निरख लै चन्दा वाळी
जोबण जगत बसन्त, पारस परसण मै
भावां भायो बसंत समलै सिरजण मै