पुसप पर कवितावां

अमेरिकी कवि एमर्सन ने

फूलों को धरती की हँसी कहा है। प्रस्तुत चयन में फूलों और उनके खिलने-गिरने के रूपकों में व्यक्त कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता74

रोहिड़े रा फूल

मृदुला राजपुरोहित

फरक कांई

राजूराम बिजारणियां

लय

रोशन बाफना

अगनी मंतर

भगवती लाल व्यास

म्हैं रूंख

कृष्णा आचार्य

चौबोली

शिवराज छंगाणी

म्हारो मन्न

सत्येंद्र चारण

थे

सुशीला चनानी

जीवणौं

मदनमोहन पड़िहार

मै’हक

धनंजया अमरावत

कतल

कैलाश मनहर

पड़ूत्तर

रचना शेखावत

फूलम-कथा

मणि मधुकर

जवाब

ज़ेबा रशीद

आंकड़ा का फूल

प्रेमजी ‘प्रेम’

म्हारा हिस्सा को अहसास

हरिचरण अहरवाल 'निर्दोष'

आखर–बीज

मोनिका गौड़

वसन्त वेळां

जयसिंह चौहान 'जौहरी'

आ बैठ बात करां - 3

रामस्वरूप किसान

अलीसन कोसे री मोत माथै

येवेजनी येव्तुसेंको

मैणत री बूंदां मांय

दीपचन्द सुथार

सबद : छह

प्रमोद कुमार शर्मा

रातरांणी

मणि मधुकर

पून

यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र'

बेल म्हूं

सन्तोष मायामोहन

आषाढी बिरखा

नंदू राजस्थानी

अै सवाल

ओंकार श्री

रूंख

सूर्यशंकर पारीक

आगे

रोशन बाफना

चोरी

पारस अरोड़ा

एकलो हाथ

भगवती लाल व्यास

माळी री हुंसियारी

गिरधारी सिंह राजावत

डाळी पर डाळी रै लचकै

मालचंद तिवाड़ी

सपनो

गोरधन सिंह शेखावत

रोहिड़ा रौ बन

धनंजया अमरावत

पा’वणा

कल्याणसिंह राजावत

चुम्मौ

मणि मधुकर

अस्यां थोड़ी ई होवै छै

हरिचरण अहरवाल 'निर्दोष'

आप री माया

मोहन आलोक

प्रीत

गोरधन सिंह शेखावत

चड्डी आळो फूल

चैन सिंह शेखावत

जीवण री जुगत

थानेश्वर शर्मा