जिण रै अंतस में
घुटल आंधली आवै
अवरोधां रो बेभूज्यो
भमर चाक फिरावै
चारु मेर भंटीरा आडै
घेरो बाड़ लगावै
उण री लख साधना
किणविध जतन उपावै
परवा बैरण मुळकै खोटी
बादळ दांत दिखावै
उड़ती कुरजां मेह पुकारै
अणचिंती रीस उठावै
सूखी सावण तीजां सूं
किण मौसम री आस करै
झंझा धूळ बगूलां सूं
खेजड़ लूंग-लूगड़ी गेरै
ठूंठ हरयों कद होवैलो
मुरझी अळसी कूंपळ में
जीवन रस कद उपजैलो
कीकर कांकड़ सूं ओलै-छानै
सांठगांठ री बात करै
उण खेतां में सीटा फळी री
कोई गैलो करसो आस करै।