सांच रो क्रिसन
कदै हार्यो
खोटा करमां रा कौरवां सूं।
अग्यान रो धिरतराष्ट्र
आपरा ही सारथी,
विवेक रा संजय लारै
सलाह सूत नीं करै।
अर, सुझाव नीं मानै
सद्-ग्यानी विदुर रो।
ईं लेखै ही तो
मूंडा ताईं धसग्यो
स्वारथ अर मोह रा दळदळ में,
बळोकड़ै दुर्योधन रै साथै।
निरासा रो बुढ़ऊ पितामह
देखतो रेवै माथो झुका’र
चोखा करमां रा पांडवां री,
आसा भरी पांचाली रो चीर हरण।
त्याग रो धरमराज
थाक’र बैठ्यो छै।
सांच रो क्रिसन अेकलो
हेला पाड़ै छै।
संघर्ष रा अरजुण नै,
साहस रा भीम नै..।
क्यूं कै अबै
घरां-घरां में
होर्यी छै महाभारत।