आदमी नै बईरु
अेक गाड़ी ना बे पईड़ा
अेक सिक्का ना बे पेलू
के पसे
एक रोटला नी बे फाड़
आवी वाते केवा ने
हाम्बरवा मअें ताजी लागे
पर ऊण्डो उतरो
तो ढोल मअें पोल’स् है
समाज मअें आजे भी
बईरा नी जात वां'स् है
जो हती
अेनी सिंता कीनी अे न्हें हैं
काले भी ई तवा अती
आजे भी है
आवती काले भी रैगा
म्हने रई रईने
विचार थाये
के जारे घर नुं काम हो
वंसवेल नी सिंता हो
के पसे सभ्यता नै
संस्कृति ने जारब्बबा नी वात
पेलू पेल बईरु’स् कैम याद आवे
बईरु केवल जीम नो भार झेलवा'स् है
हुं अैनु कोई मान धर्म नती।
अैनु आपडू कोई वजूद नती
है केम नती
अेक वगत केवल अेक वगत
तमें बईरा वना
आणी दुनिया नी कलपना करो
कैम घबराई ग्या
तौ पसे जाणी लो
जार तक तमें बईरा ने
अैनु मान न्हें आलोगा
आणी दुनिया मअें
अैनी जगा नें मलेगा
तार तक समाज मअें
सान्ति समृद्धि अने तरक्की
नी वात करवी बेमानी है।