रस्तै बेवतौ अेक मंगतौ बोल्यौ—

''म्हैं तो म्हारौ पेट भरूं मांग’र

थे क्यूं नीं करदौ मांगणौ सरू!

जद आपां सगळा मांगण लाग जास्यां

तद आपणौ देस

हुय जासी आपै आतम-निरभर!''

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थानी मासिक) ,
  • सिरजक : शंकरसिंह राजपुरोहित ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकासण ,
  • संस्करण : जुलाई 1987
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