रस्तै बेवतौ अेक मंगतौ बोल्यौ—
''म्हैं तो म्हारौ पेट भरूं मांग’र
थे ई क्यूं नीं करदौ मांगणौ सरू!
जद आपां सगळा मांगण लाग जास्यां
तद आपणौ औ देस
हुय जासी आपै ई आतम-निरभर!''