भूख पर कवितावां

भूख भोजन की इच्छा प्रकट

करता शारीरिक वेग है। सामाजिक संदर्भों में यह एक विद्रूपता है जो व्याप्त गहरी आर्थिक असमानता की सूचना देती है। प्रस्तुत चयन में भूख के विभिन्न संदर्भों का उपयोग करती कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता91

औ कुण आयो, औ कुण आयो?

आईदान सिंह भाटी

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

भूख अर कविता

आशीष पुरोहित

त्यूंहार

राजेन्द्र गौड़ 'धूळेट'

भूख रौ रूंख

विक्रमसिंह गून्दोज

भूख भाव

प्रहलादराय पारीक

करड़ो काळजो

मदन गोपाल लढ़ा

भूख

सतीश गोल्याण

मानखो

मोहम्मद सदीक

नटरू

सत्यदीप ‘अपनत्व’

गरीब बापड़ो

भूरचन्दर जैन

हास्य कवितावां

शंकरसिंह राजपुरोहित

भासा अर भूख

कृष्ण कल्पित

लालची मिनख रो पेट

जेठानंद पंवार

खा’र मरग्यो

ओम पुरोहित ‘कागद’

भूख मरगी

पारस अरोड़ा

उण री आंख्यां में

अर्जुनदेव चारण

हिसाब

पारस अरोड़ा

भूख

नरेन्द्रपाल जैन

अेकर आज्या रे चांद!

दुष्यन्त जोशी

खेत

संजू श्रीमाली

भूख ना मरो

मनोज कुमार स्वामी

राजा कनै

नवनीत पाण्डे

रोटी

कन्हैयालाल सेठिया

गरीबी

इरफान अली

जणी नै रुखाळ

अब्दुल वहीद कमल

अन्नपूर्णा पात्र

कन्हैयालाल सेठिया

भूख अर तिरपति

लालचन्द मानव

हाइकू

शिव शर्मा 'विश्वासु'

समाज

विश्वम्भरप्रसाद शर्मा ‘विद्यार्थी’

आतम-निरभर

शंकरसिंह राजपुरोहित

कतना दन और?

रघुराजसिंह हाड़ा

सुपना अर भूख

पूनमचंद गोदारा

भूख

शंभुदान मेहडू

आजादी

भगवती लाल व्यास

मनुहार

कृष्ण बिश्नोई

चोंचळा

कृष्ण कुमार स्वामी

आतम भूख

मालचंद तिवाड़ी

अणसैंधी भूख

गौरीशंकर निमिवाळ

रोटं नी लड़ाई

जगमालसिंह सिसोदिया

ओळखाण

मणि मधुकर

फरियाद

हीरालाल शास्त्री

गाय

राणुसिंह राजपुरोहित

भूख

धनंजया अमरावत

पेट री करामात

डूंगरसिंह राजपुरोहित ‘अजनबी’

भजन मंडळी

निशान्त

दस दात : 9. साँगरी

नानूराम संस्कर्ता

पेट री भूख

विक्रमसिंह गून्दोज