काळी-पीळी आंधी

उतराद सूं

आंवती रैयी है बरसां सूं

अर मिटांवती रैयी है

जाति-सम्मता अर

इतिहास रा खोज।

आंधी अर तूफान री ताकत सूं

बणता बिगड़ता रैया

नदी अर नाळा,

कित्ता उजड़ता रैया

महल-माळिया अर गढ़

आंधी बीयां

आंवती रैयी है लगोलग

अर मिटावती रैयी हैं

इतिहास रा पाना।

मरूभूमि रा लूंठा धोरा

इण रै आदेश मुजब

बणावता बिगाड़ता रैया

भाग अठै रै मिनखां रो,

मिनख इण अबखाई नै

झेलतो रैयो अर करतो रैयो जुध

इण वेगवान आंधी सूं।

आज रो मिनख

इण आंधी सूं अणजाण नीं

अर नीं कर सकै बा

कोई लूंठी अबखाई

अबै आंधी सूं

बदळिजै सालूं साल

खेत री माटी

अर उपजावै नूवीं फसल

आंधी अबै

अणदेखी रो पर्याय नीं

आंधी अबै अेक वेग रो नांव है

जकी सैंकड़ा बरसां सूं

उतराद सूं दिखणाद खानी

चालती रैवै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : श्याम महर्षि ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 12
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