राजस्थान पर कवितावां

कविता8

इण धरती रै ऊजळ आंगण

महेंद्रसिंह छायण

ओ रूपाळो हिन्दुस्तान है

हिम्मत सिंह उज्जवल

फ़ोग

भगवती पुरोहित

हे मरुथळ री मनमोवणी मूरत!

महेंद्रसिंह छायण

काळ

भगवती पुरोहित

इणसूं किणरी हुवै नीं होड

अस्त अली खां मलकांण

आपणी संस्कृति

रमेश मयंक

मतीरो

भगवती पुरोहित