सूधै मिनखां रो इण दुनियां में मोल कठै

उपकार सरावण वाळा मीठा बोल कठै

बै मिनख गया, बै बातां बगत गटग्यो सै

बो मेळजोळ, बै न्याय तौलणियां तौल कठै

आं दिनां मिनख रा दरसण तो दोरा है

जद मिनख नहीं, तो मिनख सरीसा कौल कठै

बै छाती ठोक सांच रै सारू मर ज्याता

आं लोगां रो पण इस्सो भाग अर डोळ कठै

आवै तिंवार पण लोग लुगाई सै गुमसुम

मैंगाई परबत तळै दब्या घमरोळ कठै

हो रह्या तमासा, खेल, सीरियल टीवी पर

रावण मंथरा खूब, मिनख रो रोल कठै

सै चीज बिकाऊ, दुनियां बाजार बणी

नुकसाण नफै री चिंता, हियै हिलोळ कठै

इण धरती रा लोग आज सोरा नीं पण

‘शंकर’ अै जावै कठै और भूगोल कठै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शंकरलाल स्वामी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-33
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