किण नै याद करूं बिसराऊं

किण नै छिटका गळै लगाऊं

सगळा पग-पग घात करणिया

किण-किण रा मैं सुजस सुणाऊं

इण में कुण अमरत बिस कूंपो

निरखूं पण ओळख ना पाऊं

चारूं मेर अकाळ अकल रो

कठै ग्यान बिरखा बरसाऊं

राड़ नहीं आछी करणी पण

धन दे-दे कद तक रीझाऊं

किण नै याद करूं बिसराऊं

किण नै झिटका गळै लगाऊं।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : दीनदयाल ओझा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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