चावा लेखक-संपादक। समै-समै पर कविता कर्म ई।
खरी-खरी कैवणिया खूटा
किण नै याद करूं बिसराऊं
पग-पग भूंडा हाल कबीरा
समझ नी आवै अबै म्है कंई करूं