हिवड़ै मैं खटकै पीड़, सुणाऊं कठै-कठै?
नागी हुई है लाज, छिपाऊं कठै-कठै?
सै री निजर काची पड़ी, स्वारथ री चूंध सूं,
चस्मौ लगायां भींत व्है, जाऊं कठै-कठै?
दौलत अगणी टोपियां, कै तूंद रै पड़ी
ओ पीढियां रो ब्याज, चुकाऊं कठै-कठै?
जो आब बांटतो हो मुलक, सगळै खलक नै
उण आंधड़ै री लाकड़ी, लाऊं कठै-कठै?
सपनां में जियां उमर भर, वै ई बिखर गया
दागी है सगळा फूल, सजाऊं कठै-कठै?
मौसम रै रंग सूं रंगीजै जिणरी टोपियां
उण टोपियां रै भोग लगाऊं कठै-कठै?