रुत रंगरूड़ी आयी है फागण री!

सो मत गौरी! अै रातां है जागण री!

फूल कळ्यां मदमाता मुळकै, रंग बरसै!

अंग परसै, सौरम सरसै, तन-मन तरसै!

प्रीत-गीत में रमी सांस वैरागण री!

सो मत गौरी! अै रातां है जागण री!

बायरियो रंगरसियो हेतूलो डोलै!

रस घोळै, मनवार तणी वाणी बोलै!

रात च्यानणी बणगी सेज सुवागण री!

सो मत गौरी! अै रातां है जागण री!

तन-मन रीझै, आपै मतै प्रीत जागै!

गायीजै रस-गीत, रीत रंग अनुरागै!

विरह-विथा धारी है चलगत नागण री!

सो मत गौरी! अै रातां है जागण री!

रुत री राधा सजी-धजी मदछक नाचै!

कुदरत-तणो कन्हैयो रास धमचक राचै!

आस पुरीजै, इयां रात बड़भागण री!

सो मत गौरी! अै रातां है जागण री!

स्रोत
  • पोथी : मरवण तार बजा ,
  • सिरजक : किशोर कल्पनाकांत ,
  • प्रकाशक : कल्पनालोक प्रकाशन (रतनगढ़)
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