13 दिसबर री रात भारतीय सिनिमा सारू घोर काळी रात साबित हुई। कला-प्रेमियां री दुआवां अर फिलमकारां री उम्मीदा माथै पाणी फेरती थकी जगचावी भारतीय अभिनेत्री स्मिता नै जिंदगी डसगी अर मौत री लड़ाई में मौत जीतगी। लगौलग 25 घंटां तांई जूझती रैयी। रात रा साढी बारा बजियां मौत रौ बख लाग ई ग्यौ। अर जीवण रै रंगमंच माथै आपरी भूमिका सफळतापूर्वक निभा’र चुपचाप विदा हुयगी। सदीव रै वास्तै। नीं तो किणी सूं ई कीं कैयौ अर नीं ई किणी सूं कीं सुण्यौ! छोडगी आपरै प्रेमी अर पति राज बब्बर सारू प्रीत री अेक निसाणी, आपरौ बेटौ!
किणी ‘शुभ दिन’ री उडीक में वा आपरै बेटै रौ नाम तकात नीं धर्यौ हौ। उणनै कांई ठा हौ के वा आपरै बेटै नै अेक व्हालौ सो नाम दियां बिना ई इण दुनियां सूं सजा रै वास्तै जावण वाळी है।
स्मिता पाटील अभिनेत्री रै रूप में भारतीय नारी सूं जुड़्या केई मिथ्या जाळ आपरै बेजोड़ अभिनय रै पाण बौत ई तीखैपण अर सफळता सूं काट्या हा, अर भारतीय नारी रै साचाणी रै सुखां-दुखां नै सारथक अभिव्यक्ति दीवी ही। इत्ती कम उमर में स्मिता नै जकौ जस मिलियौ, वो इचरजजोग तो हौ ई, ईसकै जोग ई हौ। भगवान नै ई सायत दुनिया सूं ईसकौ हुयग्यौ हौ, अर वे उणनै आपरै कनै बुलाय लियौ।
27 नवंबर री रात रा स्मिता ‘ब्रीच कैंडी अस्पताळ’ में अेक बेटै नै जनम दियौ हौ। अस्पताळ सूं घरै बावड़ियां रै बाद सूं ई उणनै कदै-कदैई हळकौ-सो बुखार हुय जावतौ हौ। पण इण बुखार नै नीं तो स्मिता या राज बब्बर ई गंभीरता सूं लियौ अर नीं ई उणां रौ फैमिली डाक्टर।
12 दिसंबर नै ई वा इज हालत ही। राज बब्बर लाग्योड़ौ हौ ‘होप 86’ कार्यकम में। लगै-टगै दिन रै 3 बजियां सूं स्मिता रौ बुखार बढण लागौ अर वा घबड़ाट मैसूस करण लागी। जद राज बब्बर वो सारा काम धाम छोड’र न्हाटतौ घरै पूगै। धीमै-धीमै स्मिता रौ बुखार ई बढतौ ई ग्यौ। तुरंत फैमिली डाक्टर नै सूचना दिरीजी। डाक्टर बुखार री ठीक-ठीक वजै बतावण में नाकाम रैयौ, पण दवा चालती रैयी। उण बागत तांई राज बब्बर अर परिवार रै दूजै सदस्यां नै आवण वाळी खतरनाक स्थिति रौ गुमान तक नीं हौ। 10 बजतां-नीं बजतां बुखार बेजा ई बढग्यौ। उणनै खून री उलटियां हुई अर वा बळ खा’र आपरै पलंग सूं हेटै पड़गी। इणी रै साथै वा बेहोश हुयगी। अर आ बेहोशी पाछी टूटी ई नीं। उणरै मूंडै, नाक अर कान सूं खून वै रैयौ हौ। उणरी आ हालत देख’र सगळां रै चेरां रा रंग उडग्या। तुरत-फुरत उणनै ‘जसलोक अस्पताळ’ पुगायौ गयौ। ठीक 11 बज’र 15 मिनट माथै उणनै अस्पताळ रै ‘इंटेसिव केयर यूनिट’ में लिजायौ गयौ। 15 डाक्टरां रौ अेक दळ इलाज में जुटग्यौ। स्मिता रै मूंडै, नाक अर कान सूं काफी खून बै चुक्यौ हौ। उणरै खून रौ ग्रुप हौ—‘ओ.आर. अेच. पाजिटिव।' डाक्टरां कैयौ के लगौलग खून री जरूरत है अर वो ई ताजौ। ‘ब्लड बैंक’ या स्टॉक रौ नीं। ताजौ खून देवण वास्तै ‘ओ.आर. अेच. पाजिटिव’ ग्रुप रै मिनखां री व्यवस्था करीजी।
आखी रात ‘जसलोक अस्पताळ’ रै 19 वैं माळै आयै थकै ‘इंटेसिव केयर यूनिट’ में राज बब्बर रै साथै उणरै छोटै भाई किशन बब्बर, स्मिता रै माता-पिता अर गिण्यै-चुण्यै हेताळुवां बेचैनी में काटी। डाक्टरां रौ दळ तै नीं कर पा रैयौ हौ के आखिर स्मिता नै हुय कांई ग्यौ? वा लगौलग ‘कोमा’ री हालत में ही। उणरै डील में जित्तौ ई खून पुगायौ जावतौ, वो सारौ ई मूंडै, नाक-कान अर आंख्यां सूं बारै निकळ जावतौ। स्मिता री इण बीमारी री खबर जंगळ में आग री दांई सारा मुल्क में फैलगी।
ज्यूं-ज्यूं खबर फैलती गीय, त्यूं-त्यूं ‘जसलोक अस्पताळ’ में फिलमी हस्तियां अर आम मिनखां री भीड़ बढती गयी। अस्पताळ में भीड़ रै बिच्चै चुपचाप ऊभी ही पूनम ढिल्लो। पद्मिनी कोल्हापुरे आयी अर आवतां ई रोवण लागी। सफेद साड़ी में लिपट्योड़ी रेखा भाटै री किणी मूरती री तरियां बैठी शून्य में ताक रैयी ही। राजेश खन्ना, राज कपूर, राजीव कपूर, संजय दत्त, रामेश्वरी, जया भादुड़ी, प्रकाश मेहरा, बी.आर चौपड़ा इत्याद जित्ता ई अभिनेता अर अभिनेत्रियां बंबई में मौजूद हा, वे सगळा-रा-सगळा ‘जसलोक अस्पताळ’ रा चक्कर लगा चुक्या हा। अेक खूणै में चुपचाप बैठी ही शबाना। उणरौ पति जावेद, प्रकाश मेहरा रै साथै ऊभौ हौ। नीं कोई किणी सूं बातचीत ई कर रैयौ हौ अर नीं ई ‘हाय-हेलो’।
स्मिता नै देख’र ‘इंटेसिव केयर यूनिट’ सूं कोई ई बारै निकळतौ तो अेक साथै उण माथै सैकडूं लोगां री निजरां सवाल बण’र टंग जावती, अर वो कतराय’र मून धार्यां भीड़ में सामल हुय जावतौ। सिंझ्या रा 7-30 बजियां उठै हाजर लोगां नै ठा पड़गी के स्मिता रै बचण री अबै कोई उम्मीद नीं, क्यूंकै तद तांई उणरै जित्तौ ई खून चढाईज्यौ हौ, उणरौ रत्ती भर ई उणरै डील में नीं ठैर्यौ।
अर सेवट आ आशंका सही साबित हुई।
14 दिसंबर री सुबै जकौ सूरज ऊगियौ, उण में नीं तो ताप हौ अर नीं उजास। सगळां रै ई अंतस में सूनौपण हौ अर नैणां में उदासी। कार्टर रोड माथै आयौ ‘वसंत फ्लैट’ जकौ के स्मिता रै पिता रौ हौ अर जठै स्मिता अर राज बब्बर रैय रह्या हा— जाणै अेक तीरथ स्थळ बणग्यौ हौ। च्यारूं मेर लोगां री उमड़ती भीड़ आपरी व्हाली कलानेत्री रै छेहलै दरसणां सारू बेचैन हौ। पण वे फगत संवेदना ई परगट कर सक्या, छेहला दरसण नीं, क्यूंकै स्मिता रौ पार्थिव शरीर तो ‘नायर अस्पताळ’ रै ‘कोल्डरूम’ में धर दियौ गयौ हौ ताकै दाह संस्कार स्मिता री बैनां गीता जेठमलानी अर डॉ. अनीता देश मुख रै अमेरिका सूं आयां रै बाद ई कर्यौ जा सकै। गीता रा सुसरौजी भूतपूर्व सांसद राम जेठमलानी सुबै ई आयग्या हा। शालिनी ताई पाटील ई आयी। दोपार रा आया शरद पंवार, प्रभा राव अर बंबई रा मेयर दत्ता नलावडे। वे सुझाव दियौ के दाग-संस्कार सांताकुज रै बदळै शिवाजी पार्क रै मसाण में कर्यौ जावै क्यूंकै महाराष्ट्र रै विभूतियां री छेहली जात्रा नागरिक सम्मान रै साथै शिवाजी पार्क सूं निकळती आयी है।
राज बब्बर अचेत-सो हौ। उणरी आंख्यां खुली ही पण चेतौ बिलकुल नीं हौ। दो रातां सूं लगौलग जागण अर गैरौ सदमौ खेलण री वजै सूं डाक्टरां उणनै नींद री सूई दे’र सुवाण दियौ। आपरी स्मिता री जिंदगी बचावण सारू वो खुद ई दो बोतल खून दियौ हौ, जिणरी वजै सूं उणमें काफी कमजोरी आयगी ही।
नादिरा बब्बर रौ रोवतां-रोवतां बुरौ हाल हौ। उणनै धीजौ बंधाय रैया हा राज रा पिता कुशल बब्बर, जका के स्मिता रै बेटै नै देखण सारू आगरा सूं बंबई आया ई हा। उणां री जोड़ायत ई आपरै पोतै ने देखण सारू आयोड़ी ही। उणां नै कांई ठा के इण बार स्मिता सूं उणां री मुलाकात छेहली मुलाकात साबित हुसी।
रात रा मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण नांदेड़ सूं बावड़तां ई आपरी पत्नी कुसुमताई अर शिक्षामंत्री राम मेघे रै साथै स्मिता रै घरै पूगिया अर शिवाजी राव पाटील अर राज बब्बर नै धीजौ दियौ।
डेढेक बजियां रात रा स्मिता री दोनू बैनां ई अमेरिका सूं आयगी। छोटी बैन गीता रा आंसू तो रोक्यां नीं रुक रैया हा। जनक जेठमलानी सूं ब्याव कर’र अमेरिका में बसण सूं पैली तांई वा स्मिता री हर शूटिंग अर समारोह में उणरै साथै जावती।
15 दिसंबर री सुबै 7 बजियां ‘नायर अस्पताळ’ सूं स्मिता रौ पार्थिव शरीर उणरै रैवास माथै लाईजियौ अर लोग समंदर रै उनमान उमड़ पड़्या।
छेहली विदाई देवण सारू पूरी बंबई उणरै चौखट माथै आयोड़ी ही। स्मिता नै सवागण रै लाल जोड़ै में सजायौ गयौ। मांग में सिंदूर भर्यौ गयौ अर लिलाड़ माथै लाल टीकी लगायी गयी अर सोनै रौ मांगटीकौ पैरायौ गयौ—अेकदम बीनणी-सी लागै ही स्मिता।
ठीक दस बजियां आ बीनणी बाबौसा अर पिवजी रै घर सूं अणजाण देस रै छेहलै सफर माथै निकळ पड़ी—फूलां सज्यै वाहन माथै।
‘राम नाम सत्य है’ अर ‘स्मिता पाटील अमर रहे’ रै गगनभेदी नारां रै साथै सैकड़ूं गाडियां रौ काफिलौ शिवाजी पार्क कानी चाल पड़्यौ। सड़क रैं दोनूं कानी लोग अेक महान अभिनेत्री नै छेहली विदाई देवण सारू घंटां सूं बाट जोवै हा।
शिवाजी पार्क में शिवजी री मूरती रै ठीक नीचै फूलां सूं सज्यै तंबू में स्मिता रौ पार्थिव शरीर आज जनता रै दरसणां सारू धर्यौ गयौ हौ अर भीड़ टूट पड़ी ही। स्मिता रै सिरांतियै अेक बैनर टंग्योड़ौ हौ जिण माथै लिख्यौ हौ—‘स्मित लोपले’ मतलब अेक मुळक लोप हुयगी।
शरद पंवार अर मेयर दत्ता नलावडे नागरिक समिति रै तत्वावधान में सगळी व्यवस्था कर राखी ही। ओ पैलौ मौकौ हौ जद किणी फिलमी हस्ती नै अैड़ौ नागरिक सम्मान दिरीज्यौ। फिलमकारां अर आम जनता रै अलावा महाराष्ट्र रा वित्तमंत्री शुशीलकुमार शिंदे, भूतपूर्व रेलमंत्री अर सांसद मधु दंडवते, वयोवृद्ध समाजवादी नेता अेस. अेम. जोशी, भूतपूर्व मेयर छगन भुजबल, भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, राज्य कांग्रेस अध्यक्ष प्रभाराव, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे स्मिता नै छेहली विदाई देवण सारू उठै मौजूद हा। कतार में ऊभा लोग बारी-बारी सूं श्रद्धांजळि दे रैया हा।
ठीक 11.30 बजियां शिवाजी पार्क सूं स्मिता री छेहली जात्रा सरू हुयी, कनै ई सागर-तट माथै आय पूगी श्मशान भूमि कानी। 12.00 बजतां-बजतां स्मिता री शव यात्रा चिता स्थळ माथै पूगगी। राज बब्बर रौ रोवतां-रोवतां बुरौ हाल हौ। स्मिता री मां अर बैनां नै संभाळणौ मुस्किल हुय रैयौ हौ, राज रा पिता टाबर री गळाई रोय रैया हा, शबाना, दीप्ति अर विनोद खन्ना भाटै री मूरतियां री तरियां मून ऊभा हा, पण हर मूरती री आंख्यां में आंसू हौ।
इण रोवण वाळां रै बीच में स्मिता रा पिता शिवाजीराव पाटील आपरौ आपौ बिलकुल नीं गमायौ। पण उणां रा समाजवादी साथी अेस. अेम. ज्यूं ई उणां रै कंधा माथै हाथ धरियौ, धीरज रौ बांध सेवट टूट ईग्यौ।
राज बब्बर डबडबायै नैणां सूं स्मिता नै निरख रैयौ हौ। निरीह-सो लाग रैयौ हौ। जीवण भर साथ निभावण रौ वादौ करण वाळी उणरी साथण आज उणसू दूर अेकली ई जा रैयी ही सदीव सारू। अमरीशपुरी राज रै कंधै माथै हाथ धरियौ अर वो समझग्यौ क अबै आयगी है आपरी प्रियतमा नै छेहली बार अेक निजर देखण री घणी। वो फफक-फफक’र रोय पड़्यौ। लोगां उणरै हाथ में चिता में दाग देवण सारू बळती लकड़ी थमायी। राज रै साथै उणरा हाथ पकड़्यां ऊभौ हौ उण रौ छोटौ भाई किशन उर्फ कुक्कू। स्मिता कुक्कू नै आपरै छोटै भाई री तरियां प्यार करती ही। उणरौ खुद रौ कोई भाई नीं हौ।
राज अर कुक्कू स्मिता नै अग्निदेव रै हवालै कर दी। च्यारूंमेर सन्नाटौ छायग्यौ अर फैलग्यौ विषाद रौ धूंवौ। सगळां री ई आंख्यां आंसुवां सूं सीच’र अेक मुळक शून्य में विलीन हुयगी।
17 अक्टूबर 1955 नै जनमी स्मिता री चावना फिलम लैण में आवण री कदैई नीं रैयी ही। उणरौ तो अचाणचक ई हुयौ हौ इण लैण में आवणौ। स्कूल अर कालेज रै दिनां में ‘स्पॉट्स’ मे जरूर रुचि राखती ही, पण गंभीरता सूं कदैई कीं नीं कर्यौ। हां, अेक चीज इस्यी जरूर ही जकी के उणरै वास्तै बौत बडी ही, अर वा ही ‘राष्ट्रीय सेवासदन’ संस्था। समाजवादी पार्टी री इण संस्था रै कला-पथ री शाखा में वा काम करती ही। ‘भारत-दर्शन’ अर ‘राष्ट्र दर्शन’ रै कार्यकमां रै त्हैत वा आखै भारत में घूम चुकी ही। राष्ट्रीय अेकता रा दो बेले कार्यकम ई दिया हा। पण थियेटर सूं कदैई कोई रिस्तौ नीं रैयौ। फिलमां में आवण सूं पैली फगत अेक अमेच्योर नाटक जरूर कर्यौ हौ।
पुणै सूं आपरी प्रारंभिक पढाई पूरी कर’र सन 1972 सूं आपरै कैरियर री सरूआत बंबई दूरदर्शन माथै समाचारवाचक रै रूप में करी। उण दरम्यान उणरै कनै ‘कॉमर्शियल फिलम इंडस्ट्री’ रा केई प्रस्ताव आया। पण वा सफा मना कर दियौ। अेक दिन समानांतर फिलमां रा निरमाता-निरदेसक श्याम बेनेगल उणरी प्रतिभा नै ओळख’र उणनै कनै पूगा अर आपरी फिलम में काम करण सारू कैयौ। स्मिता उणां नै ‘हां’ कर दियौ। इण भांत सन् 1974 सूं ले’र 1976 तांई श्याम बेनेगल सारू काम कियौ।
आपरै उण सरूआती दिनां में ई स्मिता अेकर व्यावसायिक फिलमां रा पोस्टरां माथै दीठ न्हाखता थकां कैयौ हौ—‘आपणी फिलमां में हीरोइन कीं कर नीं पावै। असलियत री आरसी नीं हुवै। भला बतावौ तो, म्हैं-थूं कांई इस्यी हां? म्हैं इस्यी नायिकावां रौ जुग ले आवणी चावूं जकी असली जिंदगी जी रैयी हुवै।’ अर वा आपरै जीवंत अभिनय रै पाण हन्दी सिनिमा रै बंबइया फारमूलै रै मिथक नै तोड़-भांग न्हाखियौ। उणरै इण ‘विद्रोह’ सूं फिलमां रा केई पूर्वाग्रह टुटिया। निरमातावां रौ बड़ी बजट री फिलमां सूं मोहभंग हुयौ। अभिनेत्रियां रा बे सौंदर्य प्रतिमान अर फैनाफैन ड्रेसां नै ई महत्व दियौ जा रैयौ हौ।
स्मिता रौ फिलमां में आवण रौ मकसद सिरफ पइसा कमावण या सस्ती लोकप्रियता हासल करणौ कदैई नीं रैयौ, बल्कै वा इणां री ठौड़ बरौबर इण कोसिस में लागोड़ी रैयी कै दरसकां रौ रुचि-संसार इण बजारू किसम री फिलमां सूं हटै अर उणां रै हिरदै में सिनिमा नै ले’र अेक नवौ विचार पैदा हुवै।
स्मिता जिण फिलम में ई काम कर्यौ, उणरै माथै अेक गंभीर सोद्देश्यता रौ भाव छिप्योड़ौ रह्यौ। परगट है आपणै समाज में हाल ई अेक साधारण लुगाई नै वो अधिकार नीं है, जकौ पुरुष वर्ग नै विरासत में सैज ई मिल चुक्यौ है। कठैई उणरा अधिकार खोसीजै, तो कठैई वा क्रूर पति रै हाथां मार खा’र सदियां सूं टसक रैयी है। कठैई मजबूरी में वा यौन शोषण री शिकार है तो कठैई परंपरा अर रीत-रिवाज रै कारण दब्योड़ी अर मसळ्योड़ी है। इस्यी स्त्रियां रै चरित्रां नै जीवणौ अर उणनै आम दरसकां तांई पुगावण सारू कठण अध्यवसाय रै साथै अभिनय करणौ स्मिता रै बस री ई बात ही, अर वा बाखूबी इणांनै जीयौ ई।
जिण चरित्रां री भूमिकावां स्मिता करी है, उणारै मूळ में स्त्री री मुक्ति रौ भाव छिप्योड़ौ है। वो चायै ‘भूमिका’ में चावी मराठी मंच री अभिनेत्री हंसा वाडकर रौ चरित्र हुवौ, या ‘मंथन’ में अेक गांवठी गुजराती महिला रौ। ‘चक’ में झुग्गी-झूंपड़ी री दुनिया रै नरक में पड़ी अेक चालू औरत रौ चरित्र हुवौ, या ‘सुबह’ में उच्च मध्य वर्ग रै नकली जीवण सूं विद्रोह करण वाळी महिला रौ तेवर हुवौ। आं सब चरित्रां में आपरै अभिनय री ऊष्मा सूं स्मिता भारतीय समाज री नारी रा अणगिणत रूपां रौ काफी जीवंत रूपांकन कर्यौ है।
आ दूजी बात है के जे वा जीवती रैवती तो सायत कीं और इस्यौ करती जकौ के अब तांई नीं कर्यौ। पण हर कलाकार पैली अेक मिनख है। मिनख री नियति है—कदैई ई बिना बतायां, बिना जाण्या मर जावणौ, खतम हुय जावणौ। 14 दिसंबर 1986 रै दिन स्मिता री मिरतू ई कीं इण तरै री है। इणनै स्वीकारणौ ई हुवैला।