संघर्ष पर लेख
जलाल और बूबना की प्रेमकथा राजस्थान में सुप्रसिद्ध है। इसी प्रकार यहाँ जलाल के सम्बंध में कई लोकगीत भी गाए जाते हैं, जिनमें से अनेक प्रकाशित हो चुके हैं। फिर भी कई गीत अभी अप्रकाशित ही हैं। यहां ऐसे दो लोकगीत प्रस्तुत किए जाते हैं। जलाल और बूबना के
संसार री भासावां बोलियां रो सर्वेक्षण करणिया भासाविदां रो मानणो है कै आखै जगत मांय 7000 सूं बेसी बासावां बोलियां है, जिणां मांय सूं अेकलै अेसिया महाद्वीप मांय 2500 भासावां बोलियां है। संसार री भासावां रो अध्ययन करण आळी संस्था अेथनोलॉग (Ethnologue) मुजब
म्हारौ जलम 15 अप्रैल रै दिन जयपुर शहर में हुयौ। वठै री सरजमीं रै माथै ई म्हैं होस संभाळ्यौ। बठै गोडाळियां चालणौ सीख्यौ, अर बठै ई मां-पा-बा इत्याद सबद कैवणौ सीख्यौ। बठै ई पढ-लिख’र परवांन चढ्यौ। रथखांनै रै नजदीक हवाम्हैल रै सामनै री स्कूल में अंग्रेजी
माणक रै जून 1982 रै अंक में कवि सम्मेलनां री यादां बाबत राजस्थानी कवियां रा कीं सस्मरण छप्पा हा। बीं री आगली कड़ी में मायड़ भाषा रा जूना अर जाणीता कवि रेवतदानजी चारण, गणपतचदजी भंडारी अर लक्ष्मणसिंघजी रसवंत आपरा खाटा-मीठा अनुभव ‘माणक’ रा पाठकां सांमी
अतीत री इतिहास जातरा में मौजूदा राजस्थान आपरी न्यारी-न्यारी रियासतां रै नांव सूं ओळखीजतो रह्यो है। घणी दफै राज-सत्तावां री अदळा-बदळी, सींवां री घटत-बधत अर दूजा इतिहास कारणां सूं आं रियासतां रा सरूप बदळता रह्या। प्रदेस रो उतराधो हलको जठै जांगळ नांव