संघर्ष पर बंतळ
अलेखूं फिल्मां रा निरत-निरदेसक अर नरतक प्रवीण कुमार मूल रूप सूं राजस्थान रै कांकरोली रा रैवासी। भट्यै-भट्यै, गठीलै अर स्वस्थ सरीर रा मालिक प्रवीण कुमार केई फिलमां में सह-अभिनेता रै रूप में काम कर्यों। हाल ई आप कसनै मैणत करै। आप में अहम अर बणावटीपणो
राजस्थानी तो अेक अभियान छै हाड़ौती अंचल रा राजस्थानी लेखक प्रेमजी प्रेम रौ जनम कोटा जिलै रै घघटावा गांव में 1 मार्च 1943 नै हुयौ। राजस्थान विश्वविद्यालय सूं आप हिन्दी अर अंगरेजी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि हासल कीवी। आजकल आप हाड़ौती साहित्य में
ऊंट री खाल माथै मीनाकारी रा उस्ताद मोहम्मद असग़र उस्ता राजस्थान री धरती सैकडूं बरसां सूं साधू-संतां, वीरां-सतियां अर कवियां-कलाकारां री रैयी है। साधू-संतां आपरी इमरत वाणी सूं लोगां नै सही रस्तौ दिखायौ, तो वीरां-सतियां इण धरती री मान-मरजाद खातर प्राण
राधाकिशन चांदवाणी : सबसूं पैला ‘माणक’ रै पाठकां नै आपरौ कीं परिचय दिरावौ? हरीश भादाणी : म्हारौ जनम बीकानेर में ब्राह्मण (भादाणी) परिवार में होयौ। अर म्हारी शिक्षा ई बीकानेर में हुई। सरूपोत री शिक्षा पूरी नीं कर सक्यौ। इणरौ कारण म्हारी घरू परिस्थितियां
राणी लक्ष्मीकुमारी चूंडावत राजस्थानी साहित्य रौ ठावकौ अर ख्यात नांव। सन् 1916 में देवगढ़ (उदयपुर) में जनम्या राणीजी साहित्य अर राजनीत दोनूं ठौड़ां राजस्थानी नारी चेतना अर ओळख रै महताऊ पखां माथै समाज नैं चेतावता थकां जोरदार दखल दीवी। फ्रांसिस टैफ्ट रै
म्हारौ जलम 15 अप्रैल रै दिन जयपुर शहर में हुयौ। वठै री सरजमीं रै माथै ई म्हैं होस संभाळ्यौ। बठै गोडाळियां चालणौ सीख्यौ, अर बठै ई मां-पा-बा इत्याद सबद कैवणौ सीख्यौ। बठै ई पढ-लिख’र परवांन चढ्यौ। रथखांनै रै नजदीक हवाम्हैल रै सामनै री स्कूल में अंग्रेजी
राजस्थांन रा राजनेता राजस्थांनी भासा सारू गहराई कदैई विचार नीं करियौ प्रहलाद जोसी : राजस्थान अेक पिछड़ियोड़ौ प्रांत गिणीजै, इणरै सरवांगीण विकास सारू आपनै किसा-किसा कांम महताऊ लागै? भैरौसिंघजी सेखावत : आ बात सही है के राजस्थान अेक पिछड़्योड़ौ प्रांत