निर्गुण भक्ति काव्य पर पद

पद63

धन धरती मै धरै

मोहनदास जी

साधो ऐसी खेती करिये

संत दरियाव जी

दिलदार मेरे प्यारे

आत्माराम 'रामस्नेही संत'

दिलदार मेरे सइयाँ

आत्माराम 'रामस्नेही संत'

ऐसे नहीं धीजिए

आत्माराम 'रामस्नेही संत'

चौरासी में दुख घणौ

संत मूलदास जी

सुख संपत मन जाय सरीरा

संत सेवगराम जी महाराज

ऐसे पलकन छांड्यौ

स्वामी देवादास जी

हरि भगति बेलि मन में लगाय

आत्माराम 'रामस्नेही संत'

संतो! राम रजा मैं रहिये

हरिदास निरंजनी

बाजीगर बाजी रची

हरिदास निरंजनी