रात पर कवितावां

उजाले और अँधेरे के प्रतीक

रूप में दिन और रात आदिम समय से ही मानव जिज्ञासा के केंद्र रहे हैं। कविताओं में रात की अभिव्यक्ति भय, आशंका और उदासी के साथ ही उम्मीद, विश्राम और शांति के रूप में हुई है। इस चयन में उन कविताओं को शामिल किया गया है; जिनमें रात के रूपक, प्रतीक और बिंब से जीवन-प्रसंगों की अभिव्यक्ति संभव हुई है।

कविता80

आंगणैं रो हक

राजूराम बिजारणियां

हडूडो

प्रेमजी ‘प्रेम’

ओपमा

रामनिवास सोनी

मा रिसाणी है

राजूराम बिजारणियां

चांनणी रात

रेवतदान चारण कल्पित

रात बावळी

राजू सारसर 'राज'

रात

आईदान सिंह भाटी

चिटली पर चांद

सत्यदीप ‘अपनत्व’

कांच री आस्था

रचना शेखावत

रगत री बिरखा

राजेन्द्र जोशी

म्हारी साख

मनोज पुरोहित 'अनंत'

अेकली

मणि मधुकर

मिनख री छायां

त्रिभुवन

ऊजळी रात

रचना शेखावत

दरसाव

संजय कुमार नाहटा 'संजू'

म्हारो प्रणाम!

राजेश कुमार व्यास

घंटी

छत्रपाल शिवाजी

दिन रा घोबा

इरशाद अज़ीज़

चांद बिचै खेजड़ौ

धनंजया अमरावत

लावौ दौ माचिस

पारस अरोड़ा

थार मैं रातां

सुनील कुमार लोहमरोड़ ‘सोनू’

दिन

धनंजया अमरावत

बण सोची ही

सत्यदीप ‘अपनत्व’

अंधारी-जातरा

किशोर कल्पनाकान्त

बापड़ा दिन रात

ओम पुरोहित ‘कागद’

सरवर तीरां चांदणी

प्रेमजी ‘प्रेम’

रातरांणी

मणि मधुकर

जातरा

थानेश्वर शर्मा

अंधारपख

श्याम महर्षि

काळो अंधियारो

कृष्णा आचार्य

सूरज

इरशाद अज़ीज़

उगतो सूरज

उगमसिंह राजपुरोहित 'दिलीप'

इण भांत फेरूं अेक रात

मालचंद तिवाड़ी

दिन अर रात

राजदीप सिंह इन्दा

भादवै रो मेह

कृष्ण बृहस्पति

दिन

धनिज्या अमरावत

अदीठो

अनुराग

उल्लू पिछता रैयो हो

लक्ष्मीनारायण रंगा

रात

किशन ‘प्रणय’

सिंझ्या

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

जिद्दण रात (45)

सुंदर पारख

चानणी रात

शिवराज छंगाणी

सोवां

ओम पुरोहित ‘कागद’

थांरी ओळयूं

नरेंद्र व्यास