दुख पर सोरठा

सोरठा19

कामण सयणां कीध

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

रैन दिनां मत रोय

साह मोहनराज

करी मन धीर करीर

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

आवत दुख इकसार

साह मोहनराज

सज्जन तो कारण सदा

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

किण विध उतराँ पार

साह मोहनराज

बहुत बुरी है बात

साह मोहनराज

निज दुख देखे नांह

साह मोहनराज

हरी करै सो होय

साह मोहनराज

साजन गया सम्बाहि

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

दुख में दोसत दोय

साह मोहनराज

केहौ कीजै दु:ख

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

बिरला होवे बीर

साह मोहनराज

कांइ करै अणराय

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

दीह दुहेलौ जाइ

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

चिति मिलवा री चाह

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

देखि सुरंगी डाळ

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

लागी जिणरै लाय

साह मोहनराज