भूंडो अपणो भाग, सब चोखा संसार में।

रोस न किण सूं राग, चूक करम में चकरिया॥

भावार्थ:- हे चकरिया, मेरा अपना भाग्य ही बुरा है, संसार के तो अन्य सभी लोग अच्छे हैं। अतः मेरा न किसी पर क्रोध है और न किसी से अनुराग ही। मेरे कर्म में ही कमी है (भाग्य ही मंद है) ।

स्रोत
  • पोथी : चकरिये की चहक ,
  • सिरजक : साह मोहनराज ,
  • संपादक : भगवतीलाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार
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