ग़ज़ल7 अेक भायौ छै अेक बाई छै, अेक म्हूँ अेक वाँ की माई छै काल की चंता कांई घणी अंधारी छ’ या रात, पण हुयो कांई ध्यान में काणाँ काँई धार चल्या न तू ई सुधर्यो न म्हूँ अ'र यो सारो बीत बी ग्यो
रघुवीर प्रजापति मुकुट मणिराज किशन ‘प्रणय’ रशीद अहमद पहाड़ी सावित्री व्यास किशन लाल वर्मा राजेन्द्र सोलंकी गोरस प्रचण्ड