संवैया छंद5 अधम न करि मांन मांन कीयै व्है है हांन जैसै अंजुरी कौ नीर कोउ गहै नर धीर तेरी अल्प आयु तूं तो खेलता है डाव माया जोरिबै कुं जीव तलफत है अतीव यौ तौ है संसार सविकार कछु सार नहीं