
बाड़मेर रा रचनाकार
कुल: 22
कुल: 22
मध्यकाल रा सिरै डिंगल कवि अर राष्ट्रीय चेतना परक गीत लिखण वाळा पैला कवि। वीर, शृंगार, नीति, भक्ति आद सगळी धारावां में समान रूप सूं सृजन करियो।
डिंगल- पिंगल रा प्रकाण्ड पण्डित अर जगत कवि री उपाधि सूं विभूषित। 'दरजी मयाराम री बात' जैड़ी उच्च कोटि री रचना रा रचनाकार।
उत्तर मध्यकाल रा प्रमुख डिंगल कवि। फूटकर रचनावां मिळै। घणकारी रचनावां शक्ति काव्य अर नीति सूं सम्बंधित।
'ईसरा-परमेसरा' रे विरुद सूं विख्यात। डिंगल रा सिरै भगत कवियों में पैलो नांव। 'देवियाण', 'हरिरस', 'निंदा-स्तुति', 'गुण भागवत हंस' जिसी ठावकी भगतिपरक रचनावां सागै ही 'हालां-झालां रा कुंडलिया' जिसी ऊंचे दरजे री वीर रस री रचना रा भी सिरजक।
'ईस-आराधना' नांव री चावी भक्ति रचना रा सिरजण करियो पण नांव साम्यता रै कारण रचना ईसरदासजी बारहठ रै नांव मंडीजगी अर असली कवि प्रसिद्धि कोनी पा सकियो।
मालानी छैतर रा शासक रावळ मल्लीनाथ री राणी अर योग साधक उगमसी भाटी री शिष्या। भगती रा पद रचण रै साथै समाज रा नीचला धड़ा में ज्ञान री अलख जगाई।