थे बतायौ—“म्हारा बापू री आंख में

कदै आंसू नीं आवता।”

थे बतायौ— “म्हारा दादोसा री आंख में

कदैई आंसू नीं आया।”

“म्हारी जात रा बणावणिया—म्हारा बडेरा

वै कदैई रोया कोनी : वै फौलाद रा हा!”

इत्तौ कैवतां-कैवतां थांरी आंख्यां सूं आंसूड़ौ ढळकगौ

अर म्हारै होठां माथै टपकगौ—इत्तौ तीखौ हळाहळ

इत्ता नैनकड़ा प्याला में म्हैं कदैई नीं चाख्यौ हो

म्हैं निबळा नारी, परबस नारी

जिकी जुगां री संच्योड़ी पीड़ नै

समझगी उणनै पीय’र

म्हारी आतमा उणनै नीं कर रयी बरदास

उण पीड़ रै बोझ सूं तिलमिलाय उठी है।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच अक्टूबर-दिंसबर 2015 ,
  • सिरजक : अैल्फ़ाज़िना स्टार्नी ,
  • संपादक : पारस अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकासण
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