चिड़कलो चूं-चूं गावै रै, चिड़कली मन बहलावै रे।

हंसतो हंसतो आयो चांद यूं

चांदणी सरमावै रे।

दे-दे सेण प्रीत री वो यूं

लुकता-छिपतो जावै रे।

उणरो छिपणों देख मनै यूं, याद पीउ री आवै रे

चिड़कलो चूं-चूं गावै रे, चिड़कली मन बहलावै रे।

सोनै री किरणां रा संग सूं,

कलियां विकसी जावै रे।

भंवरां पड़ फूलांरै ऊपर,

मधुरस ले उड़ जावै रे

उणरो उडणो देख मनै यूं, याद पीउ री आवै रे।

चिड़कलो चूं-चूं गावै रे, चिड़कली मन बहलावै रे।

झिलमिल करती आई लहर्‌यां,

बांकी बांह पसार रे।

मूक बण्यो यो खड़ो तीर यूं

मन रो भार सम्भाळ रे।

उणरो मिलणों देख मनै यूं, याद पिउ री आवै रे।

चिड़कलो चूं-चूं गावै रे, चिड़कली मन बहलावै रे।

बादळ बरसण आया बीजळी,

रुप निरखती आवैरे।

कूं-कूं कूं-कूं करै मोरिया

नदियां कळ-कळ गावै रे।

उणरो जाणों देख मने यूं, याद पिउ री आवै रे।

चिड़कलो चूं-चूं गावै रे, चिड़कली मन बहलावै रे।

चीं-चीं करती आई चिड़कली,

मन रा पंख पसार रे।

फुदक-फुदक यूं आयो चिड़कलो,

तीखी चोंच उघाड़ रे।

उणरो आणो देख मनै यूं, याद पिउ री आवै रे।

चिड़कलो चू-चू गावै रे, चिड़कली मन बहलावै रे।

सूं-सूं करतो आयो वायरो,

ले मीठी मनुहार रे।

झुक-झुक झालर देर बुलावै,

खोलो मन रा द्वार रे।

गोधूली वेळांरै मांही, याद पिउ री आवै रे।

चिड़कलो चूं-चूं गावै रे, चिड़कली मन बहलावै रे।

फूलांरी या सेज निरखतां,

गंगा-जमुना बैवै रे।

दिवला री बाती जोड़तां,

सुलग पतंगो कैवै रे।

उणरो मरणो देख मनै यूं, याद पिउ री आवै रे।

चिड़कलो चूं-चूं गावै रे, चिड़कली मन बहलावै रे।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : चतुर कोठारी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन, पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-19
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