जद नीळा डूंगर ऊपर चढ़ जावोला

अर आभै नै हथैळी पांण पावोला

सुणोला जद नदी रै वैवता सुरां में

वोई राग जो वैवै है सदियां सूं

देखोला जद पंखेरू रौ आभै में भंवणौ

अर डूंगरी ढाळ माथै रेवड़ रौ चढ़णौ-उतरणौ

इंछा जागैला मन में धरती रै वंदण री

भले ही इण पैली नीं कियौ पूजण अर अरचण

कांठै माथै जद दरियाव नै देखोला

झळ-मंडळ सूरज रौ पीळौ पड़तौ

जाणै गुल झड़ियौ मोटी बाती रौ

अर अंत आयौ दिनूगै उजाळै रौ

फेरूं जद देखोला दरियाव में सूरज रौ डूबणौ

अर आधौ लैरां रै आंचळ में छिपणौ

थे झुक जावोला परबस मन सूं करण नै वंदण

भलैई थां कदैई इण पैली नीं करी पूजा-अरचण।

बूढ़ी आंगळियां री पोरां दाडां नै पंपोळै

आपरै टाबरां नै मांवां हेत सूं रमझोळै

मां रै हांचळ रौ निरभै रस पीवै टाबर

मन में हजार भाव अचरज रा रंगरोळता

धरा अर गिगन जद थांनै उगसावै

जीवण रै रंगरोळ री इंछा जागै

तद पगल्या थमैला

प्रगटेला कंठ सूं वंदण

भलैई थे नीं सुणी व्हौला कै

कीकर करीजै अरचण?

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : रसूल हमजातोव ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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