पीड़ भुळावण मिनख बापड़ो

दूजी पीड़ मुलावै!

समझ आसरो जिण-जिण पर बो

निज रो मन पतियासी,

बै सगळा-ही बिना नींव रा

किणरो भार उठासी,

अणजोरी रा हाथ भरम नै

झालो दे’र बुलावै!

छळतो रैवै समै ठगोरो

भोळै मन री आसा,

अण सैंदी आंगळी पकड़ले

डरपीज्योड़ी सांसां,

नैण-भूण पर नित सुपना री

लाव तिसळती जावै!

कुदरत रा सैंजोर बळद

रुत री बैली नै खींचै,

मिनख आस रै पाणी सूं नित

दे’रो दरखत सींचै,

घाणी री फेरी दळ-दळ नै

तिल रो तेल बणावै!

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : सीताराम महर्षि ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 26
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