बापू!
थारा ग्रामराज रा सपनां रा महल ढसग्या है
देश रा मिनख
अभिमन्यु री जिंयां
चक्रव्यूह में फंसग्या है,
पाछली सदी में जणां नै वोट दीधो
सब राजधान्या में जा’र बसग्या है,
गांव सामी कोई भी ना झांकै है
‘एयर कंडीशन्ड’ कमरां में बातां फांकै है,
वणां रा दरसण कदी’क टी वी पै होवै है
वोट देवण्यां आपणा भाग पै रोवै है,
वोट मांगती वेळा
जो दुबळा-पतळा हा
आजकाल सब हट्टा-कट्टा है,
जूना अर नवां
सब एक ही थैली रा चट्टा-बट्टा है,
मंच पै खड़ा हो’र
सब आदरसां रा मंतर पढ़ै है,
पण हर बार करेला नीम पै चढ़ै है!
बापू!
अे सब लोग केवण में बड़ा है
पण सब मींडक्यां रा धड़ा है,
किण नै दरद सुणावां
सब रा सब चीकणा घड़ा है,
चुण्यां पछै
जदी भी एक जगां मिल’र बैठै है
एक दूजा पै अैंठै है,
आ बात जाहिर है
अे बात रो बतंगड़ बणाबा में माहिर है,
बात-बात पै ‘वाक आउट’ होवै है
कीमती टैम नै खोवै है,
भांत भांत रा घोचा घालै है
मुश्किल सूं प्रस्ताव आगै चालै है,
गळी-गळी में चर्चा है
करोड़ां रा खर्चा है,
पण ओ ढर्रो नीं थमै है
जनता री गाढ़ी कमाई गमै है,
फिजूल में अै एक दूजा पै दोष मढ़ै है,
हरबार करेला नीम पै चढ़ै है!
बापू!
बदल्यौ-बदल्यौ बगत है
ज्यादातार बगुला-भगत है,
जणां रो तन उजळौ अर मन काळौ है
सांच बोलण्यां री जीभ पै ताळौ है,
पाछली सदी में कुछ मरद
भुगत चुक्या है सांच बोलबा रो दरद,
इण कारण
आज रो मिनख हिम्मत कर'नै भी
सांच बोलतौ-बोलतौ रूकै है
झूंठ रै सामै झुकै है,
आ बात ठावी है
सब पै स्वार्थ हावी है,
सब उल्लू सीधौ करण री बाट जोवै है
बैवती गंगा में हाथ धोवै है,
कुलमिला’र जो जतरौ बत्तो रूष्ट है।
वो उतरौ ही बत्तो संतुष्ट है,
अर संतुष्ट नी रेवै
तो पांच बरस मुश्किल सूं कढ़ै है,
हर बार करेला नीम पै चढ़ै है।