नोट

जकै कनै
घणा नोट
उण रा सिक्कै
राख मांय रोट

खटकौ

दबांवता ई
खटकौ
पंखो करै
लटकौ।

पंच

काम चावै
कित्तो ’ई हुवै टंच
बोल्यां बिना
कद रे’वै पंच।

पाठ

मास्टर जी हर साल
पढ़ावै
एक सा पाठ
है नीं ठाठ!

दांत

खावै दांत
पचावै आंत
है नीं दुभांत!

साक्षरता

गांव मांय
आई साक्षरता
बूढिया पढ़ै
काम सूं डरता

बाबौ

लीला आक
कींयां चाबां
बाबौ तो घणौ’ई के’वै
पण जींवतै नै
कींयां दाबां!

आलू

मटर
टमाटर
गौभी सागै
यारी राखै आलू
है नीं बेटौ चालू।

दादौ

लकड़ा मुसाणां मांय
अर घिरस्थी-घिरस्थी रटै
सो मांय पांच घटै
दादो फेर बी
जेवड़ी बटै।

मा

सांस आवै
जाबक दोरा
फेर बी मा
गुदड़ा मांय
घालै डोरा

दादी

दादै नै
के ठा कठै लाधी
टाबरां रै
खेलण री
आ प्यादी।

दाड़ी

बिना पाणी रै
बदै
आ बाड़ी!

टाबर

सगळा टाबर
अपणै आप नै
समझै
बाप बराबर

कूंटौ

खोलो
अर लूंटौ।

कादौ

काळो कित्तौ है
हरामजादौ!                                                                          

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : ओम पुरोहित ‘कागद’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 22
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