दीखै गुण की खान

भली करी जजमान॥

ले कबीर की कामळी।

बगला का सा ध्यान॥

भासण देता सूरमा।

रण में रीती म्यान॥

गंगाजळ को आचमन।

समंदर का गुणगान॥

बेईमान के आफरो।

भूखां में ईमान॥

कलमकार का नांव पै।

भाण्डां का सनमान॥

अरै वाह जग का धणी।

देखी थारी स्यान॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शांति भारद्वाज 'राकेश' ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 22
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