सुख रो सावण बरसै उण घर

आंगणियै दो फूल खिलै।

जै माळी हुसियार हुवै तो

विधना रा आंक टळै॥

धरती आभै बीच रुखाळौ क्यारी क्यारी सोवणी

डाळी डाळी निजर पसारां वेल फलै नीं चौगणी

बागां बीच गुलाब सरीसा फुलड़ा नाचै प्रीत पळै।

जै माळी हुसियार हुवै तो—

बाग आपणौ आपां माळी दोस करम नै देवां क्यूं

लिछमण रेखा मती उलांघो भाग भरोसै रैवां क्यूं

छोटो आंगण सुख सरसावण मन मरजी रो मोद मिलै

जै माळी हुसियार हुवै तो—

गंधारी रै सौ सुत जाया पांडव पांच धनुरधारी

भींव सरीसा जबरा जोघा अरजुन बल रो भण्डारी

अेक चन्दरमा नौ लख तारा चांद बिन्या क्यूं तिमिर ढळै

जै माली हुसियार हुवै तो—

अणचाही बेल पसरगी धरती बोझ सवै कोनी

रोटी थोड़ी मिनख मोकळा लुटती लाज रवै कोनी

साव उघाड़ा गूंगा गेला किण विध जीवै गिगन तळै

जै माळी हुसियार हुवै तो—

सिंघ सपूती जामण धरती जिणनै मती लजाईजै

नैनो सो परवार पाळजै बाळद मती बधाईजै

जिण आंगण जीवण रस छळकै उठै सांति सुख बेल फळै

जै माळी हुसियार हुवै तो—

स्रोत
  • पोथी : Badlav ,
  • सिरजक : रामनिवास सोनी ,
  • संपादक : सूर्यशंकर पारीक ,
  • प्रकाशक : सूर्य प्रकाशन मंदिर, बीकानेर
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