रोवणौ सै नै आवै

पण सगळा रो नीं सकै

जाणै वांनै कण चुप राख्या

जिंयां वांरा कोई हौठ सीड़ दीन्हा।

केई ठरिज्योड़ा पड़्या

इण डांफर मांय

केई तमीज्योड़ा घणां

इण जेठ रै तावड़ै मांय

सगळो आकास

टूट्योड़ो छातो

जठै सै सांसा लेवै सांतरी

कै वै ओढे अर पैरै

सरीर सो ढकीजै नीं

कैवणो तो चावै वै स्सौ कीं

पण जाणै वांरा कोई

होठ सीड़ दीन्हा।

केई मौत नै बांथां घातै बैठा

जिणां रो मोटियार बेटो चलग्यो

घणां कुढीजै वै मनड़ै मांय

अर कैवै

चलणो तो वांरो हो

पण बो क्यूं चलग्यो

कठै करै वै फरियाद

जाणै कोई वांरा होठ सीड़ दीन्हा।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कृष्ण बिश्नोई ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 23
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