सूरज ऊगै,
अर आंथवै
लोगड़ा सोवै, जागै अर उठै,
आप-आपरै काम धन्धै में लागै,
सिंझ्यां तक थाकै, बैठै
पण कदै-कदै–
आस बदळै।
घण हेताळू री बताई वातां में,
हियै रो ठाह पड़ै,
हियै री होठां पै आवै,
पण कदै-कदै–
विश्वास बदळै।
हरिया पानड़ा
पीळा पड़ खिर जावै–
झड़जावै,
जलम हूवै नुंवी कूंपळांरो,
ओ क्रम चालतो रैवै,
रातांई रातां में कदै-कदै
इतिहास बदळै।
इण जागां सुरगां नै सरमाणै वाळा–
महल अर बंगला
बणियां अर चूणियां,
ऊंचै आभै सूं करता नित मुजरो
पण आज बगत रै वार सूं–
उजड़ ग्या,
मुसकल रै बगत
मोटा-मोटा भूपाळां रा
कदै-कदै सांस बदळै।