मिनख री जूण हजारी है,
आंधा देखै, गूंगा बोलै, दुनियादारी है।
सरपच चालै पांगळिया तो दूरां भागै लूला,
एक पांत रा जीमण हाळा, अलग-अलग पण चूला।
काग की लीला न्यारी है।
अणहोणी सी लागै बा ही जीवण री है होणी
चौरासी मै छप्पन जुड़गा मारग दीसै कोनी।
कष्ट हिवड़ै मै भारी है।
चापलूस-बटमार-निसरड़ा जग मै कीरत गावै,
पढ्या-लिख्या तो रूळता, अनपढ़ मूठ्यां भर-भर खावै।
राम पै रावण भारी है।