लो

जुड़वा लागौ

धरती रा इतिहास में

बमबारी रो

एक और अध्याय!

डोल उठी है धरती

बोल उठ्यौ है आभौ

देख'नै

आदम री आँख्यां में ढळकता आँसू

बुसक्यां ताणती हौवा

अर चौफेराँ होता बवाल,

बाइबिल अर कुरान रा अंतस में

उभर आया

कतरा ही नुवां सवाल

हर आयत अर ऋचा

टटोळबा लागी

आपणां अंतस में लिख्या

अजर-अमर गीत री लिपि रै मांय

राख होता मिनखाचार रै लार

उठता धुँआ रो कारण

अर आपां पै इतराया—

मिनख रा गरब रो निवारण।

लगा रियौ है

नुंवा सर सूं मिनख

ईसा रा ‘क्रॉस’ पै

लहू रा छाँटा,

अर

जणां नदी-घाट्यां में

पनपी ही सभ्यता

वणां में बिखेर रियो है काँटा!

एक बार फेर

हालबा लागी

चर्च, मसीत अर मिंदर री नींवां

चालबा लागी डूंज

टुकड़ा-टुकड़ा होवण लागा

पूजा घरां रा परदा

फाटबा लागी धरम री धजा

कुण जाणै

बगत री कांईं रजा?

रण खेत में

बिछ रही लाशां पै लाशां

अर चक छाण रिया

झरोखां में बैठा

जिद्द पै अड़्या मोट्यार,

जणा रै सामै

दया री भीख

माँग रियौ मिनखाचार।

चाणचक

साँय-साँय करती हवा रै लार

फड़फड़ाबा लागौ

म्हारा कमरा में टंग्यौ

अलबर्ट आइंस्टीन रो

फोटू छप्यौ कलैण्डर

जाणै कैवण लागौ—

‘तीसरी जंग री

तो म्हूं कोनी जाणूं

पण

चौथी बार री जंग

लड़ी जासी

लाठी अर भाटा सूं

स्यात

यो ही है कुदरत रो न्याय,

जुड़बा लागौ

धरती रा इतिहास में

बमबारी रो एक और अध्याय!

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शिव ‘मृदुल’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-17
जुड़्योड़ा विसै