आ म्हारी जिंदगाणी है—
ऊजळी रेत
बैवती बणगटां सूं आंक्योड़ी
पून नै समरपित।
आ म्हारी वाणी है—
खाली घोंघौ
ध्वनि री प्रतिध्वनि
आपरै इज रुदन सूं पूरण।
आ म्हारी पीड़ है—
टूट्योड़ी सीपी
आपरै दुख रा छिण पार करती।
आ म्हारी परंपरा है—
अेकलौ समदर
जिणरै अेक कांनी हो हेत
दूजी कांनी है भुलाव।