म्हारी जिंदगाणी है—

ऊजळी रेत

बैवती बणगटां सूं आंक्योड़ी

पून नै समरपित।

म्हारी वाणी है—

खाली घोंघौ

ध्वनि री प्रतिध्वनि

आपरै इज रुदन सूं पूरण।

म्हारी पीड़ है—

टूट्योड़ी सीपी

आपरै दुख रा छिण पार करती।

म्हारी परंपरा है—

अेकलौ समदर

जिणरै अेक कांनी हो हेत

दूजी कांनी है भुलाव।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच अक्टूबर-दिंसबर 2015 ,
  • सिरजक : सेसीलिया मिरले ,
  • संपादक : पारस अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकासण
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