मूळ सूं नीं मरै

पण

सूद नीं जीवण देवै

मिनख नै,

नीं सोवै अर नीं

सोवण देवै।

सुपना में आवै अर डरावै

सूद होवै नागो पूत

भाज्यो बगै रात-दिन,

अेक दिन–

आपरै बाप रा ईज पग

पछाड़ द्‌यै।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
जुड़्योड़ा विसै