मेळौ आयौ गांव में,
रंग बिखरग्या रेत में।
ढोल नगारां री गूंज
डोलर हींडै री पींगां
लुगायां रा चूड़ा चिलकै,
बाळां रौ आणंद।
कठपुतळी नाचै डोरी में,
राजा-परजा जुद्ध।
सौदागरां री हांक सुणौ—
‘सस्ता! सस्ता! ले लौ भाई!’
पण हर चीज सूं अठै मूंगौ है
मिलणौ अर बिछड़णौ।
सांझ पड़्यां जद दीप जळै,
मेळौ थक-थक सो जावै,
रात रुकै जद आंख्यां में
मेळौ दीखै सुपनां में।